Saturday, February 5, 2022
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गुप्त नवरात्रि पर इन मंत्रों द्वारा होगी सिद्धि की प्राप्ति


दुर्गा पूजा नवरात्रि के रुप में वर्षभर में बहुत ही भक्ति एवं श्रद्धा के साथ मनाया जाता है. साल भर में आने वाले 4 नवरात्रि में *माघ* मास के शुक्ल पक्ष में आने वाले नवरात्रि गुप्त *नवरात्रि* के रुप में मनाए जाते हैं.
– फोटो : google

गुप्त नवरात्रि साधना सिद्धि का समय होता है ओर मुख्य रुप से तंत्र साधना हेतु यह समय अत्यंत ही महत्वपूर्ण है इसी कारण ये गुप्त स्वरुप में दर्शाए जाते हैं. यह समय बुराई पर अच्छाई की जीत का समय भी है क्योंकि देवी दुर्गा ने राक्षस राजा महिषासुर का वध करके संपूर्ण लोकों को मुक्ति प्रदान की थी. हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, यह माना जाता है कि देवी इस समय अपने भक्तों को आशीर्वाद देने के लिए पृथ्वी पर अवतरित होती हैं. बंगाली समुदाय के लिए दुर्गा पूजा का बहुत महत्व है. भारत में समूचे प्रदेशों में उत्तर भारत से लेकर ओडिशा, असम, त्रिपुरा, बिहार और झारखंड जैसे अन्य राज्यों में भी बहुत धूमधाम से मनाया जाता है. लोग देवी का स्वागत करने के लिए अपनी तैयारी शुरू करते हैं, गुप्त नवरात्रि का पर्व नवमी पर समाप्त होता है, जो दुर्गा पूजा के अंत और नौ दिनों तक चलने वाले नवरात्रि *उत्सव* को दर्शाता है.

गुप्त नवरात्रि मंत्र साधना

दशमहाविद्या साधना गुप्त नवरात्रों में मुख्य रुप से की जाती है. मंत्र साधना एवं सिद्धि हेतु दश महाविद्या की उपासना का बहुत महत्व बताया गया है. मंत्र साधना में कई मंत्रों का उल्लेख मिलता है. साधक साधना सिद्धि के लिए अनुकूल मंत्र को ग्रहण करके उसके जाप द्वारा सिद्धि प्राप्ती के मार्ग पर चल सकता है.

महाविद्या काली

माँ काली तंत्र साधना की मुख्य देवी हैं, ‘ऊँ क्रीं कालिकायै नमः’ मंत्र द्वारा साधना सिद्धि संपूर्ण होती है.

महाविद्या तारा

माँ तारा दशमहाविद्याओं में से एक शक्ति हैं. ॐ ह्रीं स्त्रीं हुं फट मंत्र साधना द्वारा संपूर्ण सिद्धि प्राप्ति होती है.

महाविद्या ललिता

माँ ललिता के मंत्र साधना सिद्धि हेतु ‘ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं ऐं सौ: ॐ ह्रीं श्रीं क ए ई ल ह्रीं ह स क ह ल ह्रीं सकल ह्रीं सौ: ऐं क्लीं ह्रीं श्रीं नम:।’ मंत्र का जाप उत्तम सिद्धि स्वरुप माना जाता है.

महाविद्या भुवनेश्वरी

देवी भुवनेश्वरी की सिद्धि हेतु “ऐं हृं श्रीं ऐं हृं” नामक मंत्र का जाप करने से संपुर्ण सिद्धि प्राप्त होती है.

त्रिपुर भैरवी

माँ त्रिपुर भैरवी की साधना के लिए “ऊँ ऎं ह्रीं श्रीं त्रिपुर सुंदरीयै नम:”मंत्र जाप द्वारा साधना प्राप्त होती है.

महाविद्या छिन्नमस्तिका॒

माँ छिन्नमस्तिका॒ की सिद्धि हेतु “ॐ श्रीं ह्रीं ह्रीं क्लीं ऐं वज्र वैरोचिनिये ह्रीं ह्रीं फट स्वाहा ॥ नामक मंत्र जाप अत्यंत उत्तम होता है.

महाविद्या धूमावती

मां धूमावती दशमहाविद्याओं में एक हैं इनकी साधना हेतु “ॐ धूं धूं धूमावती स्वाहा”नामक मंत्र का जाप अत्यंत ही शुभ माना जाता है.

महाविद्या बगलामुखी

माँ बगलामुखी के लिए “ॐ ह्लीं बगलामुखी सर्वदुष्टानां वाचं मुखं पदं स्तम्भय, जिह्वां कीलय बुद्धिं विनाशय ह्लीं ॐ स्वाहा’ मंत्र का जाप सिद्धि प्राप्ति करने के लिए उत्तम माना गया है.

महाविद्या मातंगी

देवी मातंगी की सिद्धि हेतु ‘क्रीं ह्रीं मातंगी ह्रीं क्रीं स्वाहा:’ नामक मंत्र साधना अत्यंत ही उत्तम मानी गई है इसके द्वारा साधना सिद्धि संपूर्ण होती है.

महाविद्या कमला

माँ कमला सिद्धि प्राप्ति हेतु “श्रीं क्लीं श्रीं नमः॥”मंत्रों का जाप अत्यंत उत्तम फल प्रदान करने वाला होगा.





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